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13 August 2018
पहली कहानी ‘प्रेम पत्र’ स्कूली जीवन में होने वाले पहले प्यार, गुरूर, जलन, दोस्ती और बेहतरीन लेखन का शानदार मिश्रण है। कहानी कहीं गुदगुदाती है, कहीं इश्क याद दिलाती है, कहीं दोस्तों को याद करके रुलाती है तो कहीं एक मीठी सी याद के साथ चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान दे जाती है।

दूसरी कहानी ‘और मैं आगे बढ़ गई’ कुछ यूं लिखी गई है कि आपको लगने लगे कि यह कहानी लेखिका की ही है, बस नाम बदले गए हैं। जबकि यह कहानी सबकी है। स्त्री को गुलाम समझने वालों को आईना दिखाने वाली एक बेहतरीन कहानी है यह।

तीसरी कहानी, ‘मुझे तुम्हारे जाने से नफरत है’ काफी फिलॉसॉफिकल और कुछ ज्यादा ही गंभीर हो जाती है। कहीं-कहीं कहानी थोड़ा सा कनफ्यूज भी करती है लेकिन कहानी को पूरा पढ़े जाने तक आप मेरी राय से ताल्लुक ना ही रखें तो बेहतर हो।

दरअसल मुझे लगता है कि ‘लास्ट कॉफी’ जो कि चौथी कहानी है को किताब की आखिरी कहानी होना चाहिए। इस कहानी को पढ़ने के बाद मन कहीं खोने सा लगता है। कल्पना के पंक्षी पिंजरा तोड़ने लगते हैं। मन करता है कि खो जाऊं किसी कॉफी हाउस में और ढूंढ लूं किसी ऐसे अजनबी को जो कुछ कहानियां दे जाए। जिन्हें ना लिखा जाए ना पढ़ा जाए, बस जिया जाए।
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