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हवाएँ ग़ज़ल कहती हैं - ग़ज़ल संग्रह - कुमार रवीन्द्र hawaien gazal kahati hainghazal sangrah kumar ravindra: कुमार रवीन्द्र का हिंदी ग़ज़ल संग्रह - हवाएँ ... ravindra ke hindi ghazal  (Hindi Edition) by [रवीन्द्र, कुमार, की प्रस्तुति, रचनाकार.ऑर्ग]

हवाएँ ग़ज़ल कहती हैं - ग़ज़ल संग्रह - कुमार रवीन्द्र hawaien gazal kahati hainghazal sangrah kumar ravindra: कुमार रवीन्द्र का हिंदी ग़ज़ल संग्रह - हवाएँ ... ravindra ke hindi ghazal (Hindi Edition) Kindle Edition


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Product Description

आज समूची ग़ज़ल-कहन में एक क्रन्तिकारी बदलाव आ चुका है। कथ्य की विविधता, अहसासों की शिद्दत और कहन की नई-नई भंगिमाएँ उसमें आई हैं, जिससे पारम्परिक ग़ज़ल से उसका पूरी तरह अलगाव हो चुका है। हाँ, इससे हिन्दी और उर्दू की ग़ज़लगोई एक-दूसरे के एकदम नज़दीक आ गईं हैं। तज़ुर्बों की एकसारता से दोनों के एक-दूसरे के विरुद्ध एतराज़ों और अपने अलग-अलग अंदाज़ेबयाँ की ज़िद में कमी आई है। ज़हीर कुरेशी के अनुसार 'मध्यम मार्ग का अनुसरण' करने की प्रवृत्ति दोनों भाषाओँ में बढ़ी है। वास्तव में दोनों भाषाओँ के देशज मुहावरे तो एक ही हैं। हाँ, सोच के संस्कार, जो जातीय अस्मिता से उपजते हैं, अवश्य अलग-अलग रहे हैं। अब वे संस्कार भी धार्मिक अलगाववादी अनुष्ठानों से अलग होकर एक ही परम्परा को पोषित कर रहे हैं। इसलिए अब यह सवाल बेमानी है कि दुष्यंत के इस शे'र 'ये सारा जिस्म झुककर बोझ से दुहरा हुआ होगा / मैं सज़दे में नहीं था, आपको धोखा हुआ होगा' और बशीर बद्र के इस शे'र 'गीले-गीले, मंदिरों में बाल खोले देवियाँ / सोचती हैं उनके सूरज देवता कब आएँगे' में कौन-सा शे'र उर्दू रवायत का है और कौन-सा हिन्दी रवायत का। कुमार रवीन्द्र इस संग्रह की भूमिका में. किताब में उनकी शानदार हिंदी ग़ज़लों का संग्रह है.

Product details

  • Format: Kindle Edition
  • File Size: 664 KB
  • Print Length: 85 pages
  • Simultaneous Device Usage: Unlimited
  • Sold by: Amazon Asia-Pacific Holdings Private Limited
  • Language: Hindi
  • ASIN: B076YW3NNP
  • Word Wise: Not Enabled
  • Screen Reader: Supported
  • Enhanced Typesetting: Enabled
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