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शरीरविज्ञान दर्शन: एक आधुनिक कुण्डलिनी तंत्र(एक योगी की प्रेमकथा) (Hindi Edition) by [वज्र, प्रेमयोगी, शर्मा, डा० भीष्म ]

शरीरविज्ञान दर्शन: एक आधुनिक कुण्डलिनी तंत्र(एक योगी की प्रेमकथा) (Hindi Edition) Kindle Edition


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यह ई-पुस्तक हमारे शरीर में प्रतिक्षण हो रहे भौतिक व आध्यात्मिक चमत्कारों पर आधारित है। यह दर्शन हमारे शरीर का वर्णन आध्यात्मिकता का पुट देते हुए, पूरी तरह से चिकित्सा विज्ञान के अनुसार करता है। यह पाठकों की हर प्रकार की जिज्ञासाओं को शांत करने में सक्षम है। यह सृष्टि में विद्यमान प्रत्येक स्तर की स्थूलता व सूक्ष्मता को एक करके दिखाता है। यह दर्शन एक उपन्यास की तरह ही है। प्रेमयोगी वज्र ने इसे अपने ज्ञान/अनुभव व अपनी अंतरात्मा की प्रेरणा से रचा है; यद्यपि बाद में यह स्वयं ही अध्यात्म के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित प्रतीत हुआ। यह दर्शन कर्मयोग, तंत्र, अद्वैत/ द्वैताद्वैत, ताओवाद व अनासक्ति के सिद्धांतों पर आधारित है। इस दर्शन में देशभक्ति/राष्ट्रीयता भी कूट-कूट कर भरी हुई है। यह दर्शन लगभग २० वर्षों के दौरान, एक-२ विचार व तर्क को इकट्ठा करके तैयार किया गया, जिनके साथ प्रेमयोगी वज्र का लंबा व व्यस्त जीवन-अनुभव भी जुड़ता गया। इसीसे यह दर्शन जीवंत व प्रेरणादायक प्रतीत होता है। प्रेमयोगी वज्र को इस दर्शन से एक दिव्य, प्रगतिकारक व सुरक्षक शक्ति अपने चारों ओर अनुभव होती थी। इसका अर्थ है कि शविद(शरीरविज्ञान दर्शन) को ई-रीडिंग डीवाईसीस पर डाउनलोडिड-रूप में सदैव साथ रखने से तांत्रिक लाभ की संभावना है। इस दर्शन से प्रेमयोगी वज्र का अध्यात्म व भौतिकता को आपस में जोड़ने का लम्बा स्वपन पूरा होता है। प्रेमयोगी वज्र को पूर्ण विश्वास है कि इस दर्शन की धारणा से मुक्ति प्रत्येक मानवीय स्थिति में पूर्णतया संभव है। ऐसा ही अनुभव प्रेमयोगी वज्र को भी तब हुआ था, जब शविद के पूरा हो जाने पर, थोड़े से कुण्डलिनीयोग के अभ्यास से, कुण्डलिनी उसके मस्तिष्क में अचानक से जागृत हो गई। अपने क्षणिकात्मज्ञान के बाद जब प्रेमयोगी वज्र की कुण्डलिनी इड़ा नाड़ी में सत्तासीन हो गई थी, तब इसी दर्शन की सहायता से प्रेमयोगी ने उसका प्रवेश पिंगला नाड़ी में करवा कर उसे संतुलित किया। यह दर्शन सभी के लिए लाभदायक है; यद्यपि स्वास्थ्य व शरीर से सम्बंधित, सुरक्षा से सम्बंधित, कठिन परिश्रमी, उद्योगी, मायामोह में डूबे हुए, अनुशासनप्रिय, भौतिकवादी, वैज्ञानिक, समस्याओं से घिरे हुए लोगों के लिए; तथा धर्म, मुक्ति, मानवता, विज्ञान व कैरियर के बारे में भ्रमित लोगों के लिए यह अत्यंत ही लाभदायक है। प्रेमयोगी वज्र ने कुण्डलिनी के बारे में प्रचलित सभी प्रकार के भ्रमों को दूर करने का प्रयास किया है। मूलरूप में शविद संस्कृत भाषा में लिखा गया था। यह अन्य मिथक साहित्यों से इसलिए भी भिन्न है, क्योंकि यह मिथक होने के साथ-२ सत्यता से भी भरा हुआ है, अर्थात एक साथ दो भावों से युक्त है, पौराणिक साहित्य से मिलता-जुलता। इसे पढ़कर पाठक शरीर-विज्ञान के अनुसार शरीर की अधिकाँश जानकारी प्राप्त कर लेता है; वह भी रुचिकर, प्रगतिशील व आध्यात्मिक ढंग से। इस पुस्तक में प्रेमयोगी वज्र ने अपने अद्वितीय आध्यात्मिक व तांत्रिक अनुभवों के साथ अपनी सम्बन्धित जीवनी पर भी थोड़ा प्रकाश डाला है। इसमें जिज्ञासु व प्रारम्भिक साधकों के लिए भी व्यावहारिक कुण्डलिनीयोग का वर्णन किया गया है। आधारभूत यौनयोग पर भी सामाजिकता के साथ प्रकाश डाला गया है। प्रेमयोगी ने इसमें अपने क्षणिकात्मज्ञान व सम्बंधित परिस्थितियों का भी बखूबी वर्णन किया है। प्रेमयोगी ने विभिन्न धर्मों, वेदों- पुराणों, उपनिषदों, दर्शनों व अन्य धर्मशास्त्रों का भी अध्ययन किया है, मूल भाषा में; अतः अत्यावश्यकतानुसार ही शविद से जुड़े हुए उनके कुछेक विचार-बिंदु भी इस पुस्तक में सम्मिलित किए गए हैं। प्रेमयोगी वज्र एक रहस्यों से भरा हुआ व्यक्ति है। वह आत्मज्ञानी है व उसकी कुण्डलिनी भी जागृत हो चुकी है। उसने प्राकृतिक रूप से भी योगसिद्धि प्राप्त की है व कृत्रिम विधि/कुण्डलिनीयोग के अभ्यास से भी। उसके आध्यात्मिक अनुभवों को भी उपलेखक ने पुस्तक में लिखा है। इस पुस्तक में स्त्री-पुरुष संबंधों का आधारभूत सिद्धांत भी छुपा हुआ है। यदि कोई प्रेमामृत का पान करना चाहता है, तो इस पुस्तक से बढ़िया कोई भी उपाय प्रतीत नहीं होता। इस पुस्तक में सामाजिकता व अद्वैतवाद के पीछे छुपे हुए रहस्यों को भी उजागर किया गया है। वास्तव में यह पुस्तक सभी क्षेत्रों का स्पर्ष करती है। किसी भी समस्या के लिए यह रामबाण का काम करते हुए प्रतीत होती है। यह पुस्तक सर्वसाधारण लोगों से लेकर उच्च कोटि के साधकों तक, सभी श्रेणी के लोगों के लिए लाभदायक है। उपन्यास के शौकीनों को भी यह पुस्तक रोमांचित कर देती है। इसको पढ़कर पाठक गण अवश्य ही अपने अन्दर एक सकारात्मक परिवर्तन महसूस करेंगे। ऐसा प्रतीत होता है कि इस पुस्तक में मानव जीवन का सार व रहस्य छुपा हुआ है। आशा है कि प्रस्तुत ई-पुस्तक पाठकों की अपेक्षाओं पर बहुत खरा उतारेगी।

Product details

  • Format: Kindle Edition
  • File Size: 1409 KB
  • Print Length: 664 pages
  • Sold by: Amazon Asia-Pacific Holdings Private Limited
  • Language: Hindi
  • ASIN: B0789X89KR
  • Word Wise: Not Enabled
  • Screen Reader: Supported
  • Enhanced Typesetting: Enabled
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